आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा

आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा
रौशनी ही रौशनी होगी, ये तम छंट जाएगा


आज केवल आज अपने दर्द पी लें
हम घुटन में आज जैसे भी हो ,जी लें
कल स्वयं ही बेबसी की आंधियां रुकने लगेंगी
उलझने ख़ुद पास आकर पांव में झुकने लगेंगी
देखना अपना सितारा जब बुलंदी पायेगा
रौशनी के वास्ते हमको पुकारा जाएगा

आज अपना हो न हो पर कल हमारा आएगा ............

जनकवि स्व .विपिन 'मणि '

Sunday, February 21, 2010

कमाल है ....( गज़ल )



सारा तो काम हमने संभाला कमाल है
फ़िर भी तुम्हारे हाथ मे छाला कमाल है

मुद्दत से जो चिराग जले ही नहीं कभी
वो कह रहे हैं खुद को उजाला कमाल है

लाजमी था आज तो मुंह खोलना मगर

सबकी जुबां पे आज भी ताला कमाल है


भरता है जो किसान जमाने के पेट को
मिलता नहीं है उसको निवाला कमाल है

पेडों पे जुल्म वो भी बहुत ढा रहे थे पर
तुमने तो इनको काट ही डाला कमाल है

डा उदय मणि

8 comments:

Udan Tashtari said...

सारा तो काम हमने संभाला कमाल है
फ़िर भी तुम्हारे हाथ मे छाला कमाल है


-जबरदस्त!

अमिताभ मीत said...

सारा तो काम हमने संभाला कमाल है
फ़िर भी तुम्हारे हाथ मे छाला कमाल है

बहुत खूब भाई...

क्या काफ़िया रदीफ़ निकाला कमाल है !!

डॉ. सरोज गुप्ता said...

नैतिकता मौन हैं ,सह्रदयता गौण हैं .
कमाल ही कमाल है !!!!!

sharad said...
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sharad said...
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sharad said...

Socha tha aap ek acchhe doctor hain,
aap to ek acchhe kavi bhi hain,
KAMAAL HAI !!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

इतना ज़बर्दस्त लिख डाला कमाल है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत उम्दा ग़ज़ल प्रस्तुति!