आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा

आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा
रौशनी ही रौशनी होगी, ये तम छंट जाएगा


आज केवल आज अपने दर्द पी लें
हम घुटन में आज जैसे भी हो ,जी लें
कल स्वयं ही बेबसी की आंधियां रुकने लगेंगी
उलझने ख़ुद पास आकर पांव में झुकने लगेंगी
देखना अपना सितारा जब बुलंदी पायेगा
रौशनी के वास्ते हमको पुकारा जाएगा

आज अपना हो न हो पर कल हमारा आएगा ............

जनकवि स्व .विपिन 'मणि '

Tuesday, March 31, 2009

सूरज नया उगाना है - मुक्तक

कोटा मे हुये तीन दिवसीय नाट्य समारोह का संचालन करते हुये, शहर मे एक ओडीटोरियम की माग के संदर्भ मे कुछ एक मुक्तक लिखने मे आये - देखियेगा


ये नाटक ये रंगकर्म तो ,
केवल एक बहाना है
हम लोगों का असली मकसद
सूरज नया उगाना है


कभी मुस्कान चेहरे से हमारे खो नहीं सकती
किसी भी हाल मे आंखें हमारी रो नही सकती
हमारे हाथ मे होंगी हमारी मंजिलें क्योंकि
कभी दमदार कोशिश बेनतीजा हो नही सकती



दुनियाभर के अंधियारे पे , सूरज से छा जाते हम
नील गगन के चांद सितारे , धरती पर ले आते हम
अंगारों पे नाचे तब तो , सारी दुनिया थिरक उठी
सोचो ठीक जगह मिलती तो , क्या करके दिखलाते हम



दिखाने के लिये थोडी दिखावट , नाटको में है
चलो माना कि थोडी सी बनावट , नाटकों मे है
हकीकत में हकीकत है कहां पर आज दुनिया मे
हकीकत से ज्यादा तो हकीकत , नाटको मे है


ये जमाने को हंसाने के लिये हैं
ये खुशी दिल मे बसाने के लिये हैं
ये मुखौटे , सच छुपाने को नहीं हैं
ये हकीकत को बताने के लिये हैं


डा. उदय ’मणि’ कौशिक

8 comments:

Harkirat Haqeer said...

कभी मुस्कान चेहरे से हमारे खो नहीं सकती
किसी भी हाल मे आंखें हमारी रो नही सकती
हमारे हाथ मे होंगी हमारी मंजिलें क्योंकि
कभी दमदार कोशिश बेनतीजा हो नही सकती


Dr Sahab ,

skaratmak soch ki bhot sundar nazam kahi hai aapne....bhot bhot ..BDHAI....!!!

नीरज गोस्वामी said...

अद्भुत रचनाएँ हैं उदय जी एक से बेहतर एक....वाह...
नीरज

सब ठीक है? said...

वाह-वाह..आपकी रचनाओं को पढ़ने के बाद सिर्फ जुबान से यही अल्फाज निकलते हैं। इसके आगे क्या बोलूं। उम्मीद नहीं यकीन है कि आगे भी रचनाओं पर वाह-वाह ही निकले

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सुन्दर रजनाएँ, बधाई!

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर ... दोनो रचनाएं अच्‍छी हैं ।

Jayant Chaudhary said...

"कभी मुस्कान चेहरे से हमारे खो नहीं सकती
किसी भी हाल मे आंखें हमारी रो नही सकती
हमारे हाथ मे होंगी हमारी मंजिलें क्योंकि
कभी दमदार कोशिश बेनतीजा हो नही सकती"

इस उत्तम रचना के लिए बधाई...
मैंने हमेशा सकारात्मक विचार रखें हैं...
आपकी इन पंक्तियों से आनंद आ गया..

~जयंत

rashmi said...

kabhi damdaar koshish benateeja ho nahi sakti............taareefekaabil

rashmi said...

kabhi damdaar koshish benateeja ho nahi sakti............taareefekaabil