आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा

आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा
रौशनी ही रौशनी होगी, ये तम छंट जाएगा


आज केवल आज अपने दर्द पी लें
हम घुटन में आज जैसे भी हो ,जी लें
कल स्वयं ही बेबसी की आंधियां रुकने लगेंगी
उलझने ख़ुद पास आकर पांव में झुकने लगेंगी
देखना अपना सितारा जब बुलंदी पायेगा
रौशनी के वास्ते हमको पुकारा जाएगा

आज अपना हो न हो पर कल हमारा आएगा ............

जनकवि स्व .विपिन 'मणि '

Tuesday, March 10, 2009

हिन्दी ब्लॉग परिवार के सभी साथियों मित्रों , अग्रजों को
रंगो के इस त्यौहार पर सह्रिदय
असीम शुभकामनाएं


मौज मस्ती , ढेर सा हुडदंग होना चाहिये
नाच गाना , ढोल ताशे , चंग होन चाहिये
कोई ऊंचा ,कोई नीचा , और छोटा कुछ नही
हर किसी का एक जैसा रंग होना चाहिये


और

नजरें उठाओ अपनी सब आस पास यारों
इस बार रह न जाये कोई उदास यारों
सच मायने मे होली ,तब जा के हो सकेगी
जब एक सा दिखेगा , हर आम-खास यारों


शुभकामनाओ सहित
डा. उदय मणि

4 comments:

Udan Tashtari said...

आपको होली की मुकारबाद एवं बहुत शुभकामनाऐं.
सादर
समीर लाल

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

होली पर बहुत बहुत शुभ कामनाएँ!

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...

होली पर्व की हार्दिक ढेरो शुभकामना

mehek said...

waahh ,holi mubarak