आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा

आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा
रौशनी ही रौशनी होगी, ये तम छंट जाएगा


आज केवल आज अपने दर्द पी लें
हम घुटन में आज जैसे भी हो ,जी लें
कल स्वयं ही बेबसी की आंधियां रुकने लगेंगी
उलझने ख़ुद पास आकर पांव में झुकने लगेंगी
देखना अपना सितारा जब बुलंदी पायेगा
रौशनी के वास्ते हमको पुकारा जाएगा

आज अपना हो न हो पर कल हमारा आएगा ............

जनकवि स्व .विपिन 'मणि '

Saturday, August 29, 2009

बोल जमूरे सच सच बोल ...

video

ये जनकवि विपिन मणि की

बहुत ही लोकप्रिय ओजस्वी कविताओं में से एक है

2 comments:

प्रबल प्रताप सिंह् said...

जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनाएं....!

--
शुभेच्छु

प्रबल प्रताप सिंह

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सुलभ सतरंगी said...

आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा
रौशनी ही रौशनी होगी, ये तम छंट जाएगा..

जनकवि स्व .विपिन 'मणि' जी का काव्य आह्वान अद्भुत है.

आपको जन्म दिन की शुभकामनाएं....!