आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा

आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा
रौशनी ही रौशनी होगी, ये तम छंट जाएगा


आज केवल आज अपने दर्द पी लें
हम घुटन में आज जैसे भी हो ,जी लें
कल स्वयं ही बेबसी की आंधियां रुकने लगेंगी
उलझने ख़ुद पास आकर पांव में झुकने लगेंगी
देखना अपना सितारा जब बुलंदी पायेगा
रौशनी के वास्ते हमको पुकारा जाएगा

आज अपना हो न हो पर कल हमारा आएगा ............

जनकवि स्व .विपिन 'मणि '

Tuesday, August 5, 2008

किसी रोते हुए दिल को हँसाने का हुनर दे दे ...

यहाँ के हर मुसाफिर को , मुहब्बत की डगर दे दे
अगर तू दे सके मेरी , दुआओं में असर दे दे
कभी इसके सिवा तुझसे न कोई चीज मांगेंगे
किसी रोते हुए दिल को हँसाने का हुनर दे दे

6 comments:

Udan Tashtari said...

वाह वाह!! बहुत खूब!

Dr.Parveen Chopra said...

वैसे सो भई इतने साल चिकित्सा क्षेत्र में बिताने के बाद अपना मन तो पत्थर हो चुका है...कविता सिर के ऊपर से निकल जाती हैं लेकिन दोस्त जैसी ये पंक्तियां आपने लिखी हैं, इस तरह की बात मैं बखूबी समझ लेता हूं.....और पढ़ कर लगता है कि कोई सूफी ही यह सब कुछ कह रहा है। पंक्तियां एक कागज पर नोट कर ली हैं...और कईं लोगों को सुनाऊंगा.....यह कह के मेरी अपनी नहीं है, चुराई हुई हैं...आप का नाम भी लिख लिया है।
वैसे यह मैंने कैसे लिख दिया कि ये पंक्तियां मेरी नहीं है, ये तो सारी कायनात की इबादत है....इस में मेरा-तेरा मैं कहां से ले आया।
बहरहाल, बहुत बहुत धन्यवाद।

रश्मि प्रभा said...

aameen.......

हसरतें said...

खुशी और गम के आंसुओं में अंतर होता है खुशी के आंसू हमे हंसाते है लेकिन गम के आंसू हमे बीते दिनों की यादे दिला जाता है तो अपने लिए रोने से अच्छा है कि दूसरो के लिए रोए.

सतीश सक्सेना said...

"कभी इसके सिवा तुझसे न कोई चीज मांगेंगे
किसी रोते हुए दिल को हँसाने का हुनर दे दे"
ऐसे शब्द सिर्फ़ एक "कवि" ही लिख सकता है, बार बार पढने लायक पंक्तियाँ हैं आपकी !

Advocate Rashmi saurana said...

bhut hi badhiya.