आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा

आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा
रौशनी ही रौशनी होगी, ये तम छंट जाएगा


आज केवल आज अपने दर्द पी लें
हम घुटन में आज जैसे भी हो ,जी लें
कल स्वयं ही बेबसी की आंधियां रुकने लगेंगी
उलझने ख़ुद पास आकर पांव में झुकने लगेंगी
देखना अपना सितारा जब बुलंदी पायेगा
रौशनी के वास्ते हमको पुकारा जाएगा

आज अपना हो न हो पर कल हमारा आएगा ............

जनकवि स्व .विपिन 'मणि '

Friday, July 11, 2008

मुक्तक .....

यहाँ के हर मुसाफिर को मुहब्बत की डगर दे दे
अगर तू दे सके , मेरी दुआओं में असर दे दे
जिसे जो चाहिए उसको अता कर शौक से लेकिन
मुझे रोते हुए दिल को हँसाने का हुनर दे दे ..........


डॉ उदय 'मणि' कौशिक

2 comments:

geet gazal said...

namaskar. apki kya tareef karu, jitni karuga kam hi hogi. apke chune huye moti jaise shabd dil ko behad sukoon dete hai...mukesh masoom , executive editor-mumbai sandhya mo-9322880599

DR. UDAY MANI KAUSHIK said...

धन्यवाद् मुकेश जी
यही सक्रिय जुडाव बनाये रखें
डॉ उदय मणि कौशिक