आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा

आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा
रौशनी ही रौशनी होगी, ये तम छंट जाएगा


आज केवल आज अपने दर्द पी लें
हम घुटन में आज जैसे भी हो ,जी लें
कल स्वयं ही बेबसी की आंधियां रुकने लगेंगी
उलझने ख़ुद पास आकर पांव में झुकने लगेंगी
देखना अपना सितारा जब बुलंदी पायेगा
रौशनी के वास्ते हमको पुकारा जाएगा

आज अपना हो न हो पर कल हमारा आएगा ............

जनकवि स्व .विपिन 'मणि '

Thursday, December 11, 2008

" तीर्थ सा मन कर दिया है , बस तुम्हीं ने "

" तीर्थ सा मन कर दिया है , बस तुम्हीं ने "

उम्र भर एहसान भूलूंगा नहीं मैं


अश्रु से मेरी नही पह्चान थी कुछ
दर्द से परिचय तुम्हीं ने तो कराया
छू दिया तुमने ह्र्दय की धड्कनों को
गीत का अन्कुर तुम्हीं ने तो उगाया
मूक मन को स्वर दिये हैं , बस तुम्हीं ने
उम्र भर एहसान भूलूंगा नहीं मैं

मैं न पाता सीख ये भाषा नयन की
तुम न मिलये उम्र मेरी व्यर्थ होती
सांस ढोती शव विवश अपना स्वयं ही
और मेरी जिन्दगी किस अर्थ होती

प्राण को विश्वास सौंपा , बस तुम्हीं ने
उम्र भर एहसान भूलूंगा नहीं मैं

तुम मिले हो क्या मुझे साथी सफ़र मे
राह से कुछ मोह जैसा हो गया है
एक सूनापन कि जो मन को डसे था
राह मे गिरकर कहीं वह खो गया है

शोक को उत्सव किया है बस तुम्ही ने
उम्र भर एहसान भूलूंगा नहीं मैं

ये ह्र्दय पाहन बना रहता सदा ही
सच कहूं यदि जिन्दगी मे तुम न मिलते
यूं न फ़िर मधुमास मेरा मित्र होता
और अधरों पे न ये फ़िर फ़ूल खिलते

भग्न मन्दिर फ़िर बनाया , बस तुम्हीं ने
तीर्थ सा मन कर दिया है बस तुम्हीं ने
उम्र भर एहसान भूलूंगा नहीं मैं

7 comments:

विनय said...

बहुत अच्छे!

Mired Mirage said...

सुन्दर !
घुघूती बासूती

राकेश खंडेलवाल said...

जब किया विश्वास कर तुमने समर्पण
कौन है ? कोई विलग जो कर सकेगा
प्राण समिधा बन गये जब ओ सुधांशु
छू तुम्हें पत्थर अलौकिक बन सकेगा.

सादर

राकेश

कंचन सिंह चौहान said...

उम्र भर एहसान भूलूंगा नहीं मैं
अश्रु से मेरी नही पह्चान थी कुछ
दर्द से परिचय तुम्हीं ने तो कराया

aap ki lekhani bahut gambhirata liye hue hai

Rama said...

डा.रमा द्विवेदी said...

बहुत खूब लिखते हैं आप...ये पंक्तियां बहुत भायीं दिल को..बधाई व शुभकामनाएं..सस्नेह..

ये ह्र्दय पाहन बना रहता सदा ही
सच कहूं यदि जिन्दगी मे तुम न मिलते
यूं न फ़िर मधुमास मेरा मित्र होता
और अधरों पे न ये फ़िर फ़ूल खिलते

भग्न मन्दिर फ़िर बनाया , बस तुम्हीं ने
तीर्थ सा मन कर दिया है बस तुम्हीं ने

mystic smile 'Keya' said...

hi ... ur poems have freshness and filled wid true emotions....
god bless

संगीता पुरी said...

भग्न मन्दिर फ़िर बनाया , बस तुम्हीं ने
तीर्थ सा मन कर दिया है बस तुम्हीं ने
उम्र भर एहसान भूलूंगा नहीं मैं

सुंदर अभिव्‍यक्ति !!