आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा

आज अपना हो न हो पर ,कल हमारा आएगा
रौशनी ही रौशनी होगी, ये तम छंट जाएगा


आज केवल आज अपने दर्द पी लें
हम घुटन में आज जैसे भी हो ,जी लें
कल स्वयं ही बेबसी की आंधियां रुकने लगेंगी
उलझने ख़ुद पास आकर पांव में झुकने लगेंगी
देखना अपना सितारा जब बुलंदी पायेगा
रौशनी के वास्ते हमको पुकारा जाएगा

आज अपना हो न हो पर कल हमारा आएगा ............

जनकवि स्व .विपिन 'मणि '

Sunday, July 27, 2008

ग़ज़ल ..( पालते हैं वे कबूतर )


पालते हैं वे कबूतर ,पर कतरने के लिए
ताकि बेबस हों उन्हीं के ,घर उतरने के लिए

पीढियों से इस कहावत से हुए आगाह हम
एक मछली है बहुत पानी जह्रने के लिए

इस कहानी का कथाक जानती हैं आंधियां
एक चिंगारी बहुत ,जंगल पजरने के लिए

वक्त देता सिर्फ़ उनका साथ जो तैयार हैं
आग के मैदान से पैदल गुजरने के लिए

हो नहीं बदनाम पतझर ,हर पका पत्ता अगर
कोपलों से पूर्व हो ,तैयार झरने के लिए

हरिजनों को फूंकने की जांच वालों ने चुने
ब्राह्मणों या हरिजनों के घर ठहरने के लिए

है नहीं पोखर -कुए -तालाब की दरकार कुछ
एक चुल्लू जल बहुत है ,डूब मरने के लिए

बृजेन्द्र कौशिक

9 comments:

रश्मि प्रभा said...

bahut achhi.......
har baar kuch nayapan,kuch sachchaai liye hoti hai aapki lekhni,

aaiye mujhe bhi padh jaayen

Ila's world, in and out said...

बहुत बढिया गज़ल.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

इस कहानी का कथाक जानती हैं आंधियां
एक चिंगारी बहुत ,जंगल पजरने के लिए

बहुत सुंदर गज़ल.

Udan Tashtari said...

बेहद खूबसूरत...बहुत उम्दा...वाह!

singhsdm said...

dr kaushik
Apke blog par pahali dafa aaya. Bhi Waah...Bahoot Khoob. Yogya pita ki Yogya santan. ghzalon me to aapne kamaal kiya hai.Acche kafion ka khoobsoorat istemal kiya hai. Aapki umr to bahoot jyada nahi hai par aaapka vision bahut mature hai. Aisi ghazalon se aage me tarruf karate rahe....waqt ho to mere blog par bhi tashrif layen......fir kahoonga kamaal hai aapki ghazlen......

बाल किशन said...

"वक्त देता सिर्फ़ उनका साथ जो तैयार हैं
आग के मैदान से पैदल गुजरने के लिये"
वाह वाह
बहुत अच्छा लिखा आपने.
बधाई.

राकेश खंडेलवाल said...

है नहीं पोखर -कुए -तालाब की दरकार कुछ
एक चुल्लू जल बहुत है ,डूब मरने के लिए
अब यह सच्ची बात रहनुमासमझ सके तो लिखना ही नहीं पड़े.
सशक्त अभिव्यक्ति

vijaymaudgill said...

क्या बात है जनाब रूह ख़ुश हो गई आपकी लेखनी पढ़कर। आपको बधाई इतनी सुंदर रचना के लिए और हां अब मैं आपके ब्लाग पर आता रहूंगा।

shama said...

"Palte hain we kabootar..."! Shabd nahee soojh rahe ki kaise likhun, kitnee umdaa rachnaa hai!
Shama